दीपावली-छठ पर बिजली आपूर्ति को लेकर तैयारी तेज, व्यवस्था दुरुस्त रखने में जुटेंगे बिजलीकर्मी- समिति

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मार्च 2023 के सांकेतिक आंदोलन के बिजली कर्मियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों, दर्ज एफआईआर तथा हटाए गए संविदा कर्मियों के मामलों में न्यायोचित कार्रवाई करते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की है।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि दीपावली और छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्वों पर प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना बिजली कर्मियों की सर्वोच्च प्राथमिकता है। संघर्ष समिति ने बिजली कर्मियों से आह्वान किया है कि वे इन पर्वों के दौरान पूरी निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में जुटे रहें, ताकि आम जनता, किसानों, व्यापारियों और सभी उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों ने सदैव विद्युत व्यवस्था में सुधार के लिए रचनात्मक भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिजली कर्मियों ने लाइन हानियों में व्यापक कमी लाने, राजस्व वसूली बढ़ाने तथा उपभोक्ताओं को अधिक से अधिक विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महाकुंभ के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति के रिकॉर्ड स्थापित करना प्रदेश के बिजली कर्मियों की कार्यक्षमता, प्रतिबद्धता और अथक परिश्रम का प्रमाण है।
संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि 3 दिसंबर 2022 को तत्कालीन ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के साथ वार्ता के बाद बिजली कर्मियों की समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए लिखित समझौता हुआ था। समझौते पर प्रभावी कार्यवाही न होने के कारण मार्च 2023 में सांकेतिक आंदोलन का नोटिस दिया गया था। इसके बाद ऊर्जा मंत्री के साथ वार्ता में सहमति बनने और समझौते को लागू करने के साथ-साथ आंदोलन के फलस्वरूप की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों, एफआईआर तथा हटाए गए संविदा कर्मियों को वापस लेने की घोषणा के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई स्पष्ट घोषणा के बावजूद साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस नहीं ली गई हैं। इसके विपरीत, आंदोलन वापस लेने के बाद छह प्रमुख पदाधिकारियों के विरुद्ध स्टेट विजिलेंस की जांच शुरू कर दी गई, जिससे संबंधित बिजली कर्मियों में निराशा और असंतोष है।
संघर्ष समिति ने कहा कि आंदोलन के दौरान की गई कार्रवाइयों के जारी रहने से बिजली कर्मी और उनके परिवार मानसिक दबाव एवं पीड़ा का सामना कर रहे हैं। कुछ ऐसे बिजली कर्मियों का निधन भी हो चुका है, जिनके विरुद्ध आंदोलन के फलस्वरूप अनुशासनात्मक कार्यवाहियां चल रही थीं। ऐसी परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इन मामलों का न्यायोचित समाधान किया जाना आवश्यक है।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए शासन और पावर कॉरपोरेशन के संबंधित अधिकारियों को सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां एवं एफआईआर वापस लेने, स्टेट विजिलेंस की जांच समाप्त करने तथा हटाए गए संविदा कर्मियों के मामलों का न्यायोचित समाधान करने के निर्देश दें।
संघर्ष समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री बिजली कर्मियों की भावनाओं और उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेंगे। समिति ने कहा कि उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों की समाप्ति से बिजली कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और वे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था में गुणात्मक सुधार के लिए और अधिक एकाग्रता, निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य कर सकेंगे।
संघर्ष समिति ने पुनः स्पष्ट किया कि बिजली कर्मी प्रदेश की जनता के हित में विद्युत व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और दीपावली तथा छठ पर्व पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के अपने दायित्व का पूरी तत्परता से निर्वहन करेंगे।





