ग्रामोदय विवि में तुलसी के राम पर राष्ट्रीय विमर्श सम्पन्न

ग्रामोदय विवि में तुलसी के राम पर राष्ट्रीय विमर्श सम्पन्न

कुलपति प्रो भरत मिश्रा ने की अध्यक्षता, प्राध्यापकों ने रखे विचार

राजेन्द्र कुमार सोनी
ब्यूरो प्रमुख
कनक टुडे चित्रकूट

चित्रकूट–04 अगस्त 2022आज महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्व विद्यालय के हिंदी विभाग के तत्वावधान में सीएमसीएलडीपी सभागार में तुलसी जयंती के अवसर पर तुलसी के राम विषय को लेकर राष्ट्रीय विमर्श सम्पन्न हुआ। कुलपति प्रो भरत मिश्रा ने इस आयोजन की अध्यक्षता की। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। विज्ञान व पर्यावरण संकाय के अधिष्ठाता प्रो आईपी त्रिपाठी और प्रबंधन संकाय के अधिष्ठाता व निदेशक सीएमसीएल डीपी प्रो अमरजीत सिंह विशिष्ट अतिथि रहें।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ कुसुम सिंह विभागाध्यक्ष हिंदी एवं प्रभारी कुलसचिव ने अपने स्वागत भाषण एवम् विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि युगचेता गोस्वामी तुलसीदास जी के राम एवं राम का चरित्र ,राम तत्व, राम संस्कृति युगों युगों तक अनुकरणीय रहेगा। राम का रूप एक आदर्श पुत्र ,आदर्श पति, आदर्श शिष्य,आदर्श मित्र, आदर्श राजा का रहा है। हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए राम के आदर्श जीवन से जुड़े हुए संस्कारों एवं गुणों का अनुकरण निश्चय ही आज के जीवन के झंझावातों से निजात दिलाकर एक नई दिशा देने वाला है। राम संस्कृति की यह बड़ी विशेषता है कि आज वैश्विक जगत में उनके चरित्र और जीवन दर्शन का गुणगान, चिंतन, मनन हो रहा है।
मुख्य वक्ता डॉ.स्वर्णलता शर्मा प्राध्यापक संस्कृत ने अपने उद्बोधन में कहा कि तुलसी के रामके महत्त्वपूर्ण तीन रूप हैं सौंदर्य,शील एवं वनगमन का।इन तीन गुण रूपों का विकास क्रमश: मिथिला ,अयोध्या एवम् वन में हुआ ।मिथिला के पुष्पवाटिका में राम के सौंदर्य रूप के विकास को विभिन्न दृष्टंतों के माध्यम से स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि राम का चरित्र जल रूप था और सीता का चरित्र अमृतमय।राम और सीता का सौंदर्य के एकाकार से जल रूप सौंदर्य अमृत तत्व में परिवर्तित हो गया ,हमें इस अमृत तत्व स्वरूप राम सीता के युगल छवि का स्मरण ,आराधना, उपासना करने की जरूरत है।राम के कालजयी और कामजयी स्वरूप को पवित्र व उदात्त बताया।
विशिष्ट वक्ता व राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ नीलम चौरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि तुलसी के राम के विभिन्न रूप हैं- पारिवारिक रूप में उनके गृहस्थ जीवनरूप में पारिवारिक प्रेम, अभिभावक का उत्तरदायित्व महत्वपूर्ण है ।सामाजिक जीवन में जहां राम का चरित्र मार्गदर्शन करने वाला है वहीं उन्होंने राम के राजनीतिक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राम एक कुशल संगठक एवं समन्वयक भी थे।
कार्यक्रम का प्रारंभ संत तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मंगलाचरण प्रस्तुति डॉ आर के पांडेय व अवधेश ने की। कार्यक्रम का संचालन परीक्षा नियंत्रक डॉ ललित कुमार सिंह और आभार प्रदर्शन निदेशक दूरवर्ती प्रो वीरेंद्र कुमार व्यास ने किया। इस अवसर पर प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधकर्ता व छात्र छात्राये मौजूद रहे।

Live Cricket Live Share Market

जवाब जरूर दे 

आप अपने सहर के वर्तमान बिधायक के कार्यों से कितना संतुष्ट है ?

View Results

Loading ... Loading ...

Related Articles

Back to top button
Close
Close